*"वक़्त" और "अध्यापक" दोनों हमें सिखाते हैं। पर दोनों में फर्क सिर्फ इतना है कि...*
*"अध्यापक" सिखा कर "परीक्षा" लेते हैं और "वक़्त" परीक्षा ले कर "सिखाता" है।*
*मैं धीरे-धीरे सीख रहा हूँ कि...* मुझे हर उस बात पर प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए ॥ जो मुझे चिंतित करती है। *मैं धीरे-धीरे सीख रहा हूँ कि...* जिन्होंने मुझे चोट दी है। मुझे उन्हें चोट नहीं देनी है॥ *मैं धीरे-धीरे सीख रहा हूँ कि...* शायद समझदारी का सबसे बड़ा लक्षण भिड़ जाने के बजाय अलग हट जाने में है। *मैं धीरे-धीरे सीख रहा हूँ कि...* अपने साथ हुए प्रत्येक बुरे बर्ताव पर प्रतिक्रिया करने में मेरी जो ऊर्जा खर्च होती है | वह मुझे शिथिल कर देती है। इतना ही नहीं वो मुझे दूसरी अच्छे कार्यों में प्रवृत्त होने में भी बाधा बनती है॥ *मैं धीरे-धीरे सीख रहा हूँ कि...* मैं हर आदमी से वैसा व्यवहार नहीं पा सकूँगा । जिसकी मैं अपेक्षा करता हूँ । या मैं उसके साथ जैसा व्यवहार करता हूँ। *मैं धीरे-धीरे सीख रहा हूँ कि...* किसी का दिल जीतने के लिए बहुत कठोर प्रयास करना समय और ऊर्जा की बर्बादी है और यह आपको कुछ नहीं देता, केवल खालीपन से भर देता है। *मैं धीरे-धीरे सीख रहा हूँ कि......
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